# Lekh By Parul Singh

‘आशा की टॉयलेट कथा’

हाल ही में हुई एक घटना से आपको रूबरू करवा रही हूँ और हो सकता है की आप भी कभी ऐसी ही परिस्थितियों से गुजरे हो|

एक महिला आशा जिसने एक प्रतिष्ठित कम्पनी में उच्च पद पर कार्यभार संभाला| वेतन बहुत ही अच्छा और महिला की अपेक्षा के अनुरूप था| अपने अनुरूप पद और वेतन पाकर महिला बहुत खुश थी| परन्तु अचानक ऐसा क्या हुआ की सिर्फ चार दिन बाद ही उसने कम्पनी से इस्तीफा दे दिया?

हर देशवासी के बहुत सारे अधिकार और हक ऐसे होते है जो उनको मिलने ही चाहिए उनमें से एक अधिकार है एक ‘स्वच्छ टॉयलेट’ | हाल ही में अक्षय कुमार और भूमी की फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा’ को देखने के बाद वो फिल्म महज दो दिन के अंतराल में ही दिमाग से उतर गयी परन्तु उस फिल्म की सबसे ज्यादा अहम् भूमिका तब सामने आई जब आशा के साथ ये घटना घटी|

आशा जब पहले दिन अपने कार्यस्थल पहुचीं तो नयी उमंग और जोश के साथ कार्य के अवलोकन में लग गयी | जैसे जैसे कुछ समय बीता उसको दैनिक कार्यों के लिए ‘शौचालय’ का रास्ता खोजना पड़ा| जब उसने उस प्रतिष्ठित कम्पनी का ‘शौचालय’ देखा तो उसमें मूलभूत सुविधाएँ ही नहीं थी| एक दिन कैसे भी करके आशा ने समय निकला| दूसरे दिन वही समस्या सामने खडी थी| अच्छा पद , अच्छा वेतन परन्तु कुछ मूलभूत सुविधाओं की कमी| इस बात से आशा ने कार्यालय के लोगो को अवगत कराया परन्तु कोई हल नहीं निकला|

कम्पनी जॉइन करने के चार दिन बाद ही आशा की तबियत बिगड़ने लगी और इसके चलते उसने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया| लेकिन कितनी ही आशाएं ऐसी जो रोज इस समस्या से लड़ती है और एक साफ़ शौचालय व उसमें मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसती है|

आशा जो की एक सम्रध परिवार से आई थी उसके लिए उस नौकरी से इस्तीफा देना शायद कोई बड़ी बात नहीं रही होगी परन्तु क्या एक प्रतिष्ठित कम्पनी के मालिक का ये कर्तव्य नहीं बनता की लम्बे अरसे से उनके कार्यस्थल में जिन मूलभूत सुविधाओं की कमी है उनको पूरा करें|

जिस भी कम्पनी में फीमेल्स(महिलाएं) कार्य करती है वहां उनके लिए कुछ ज़रूरी सुविधाएँ होनी ही चाहिए| और इसके लिए एक फीमेल(महिला) को ही आवाज़ उठानी होगी| ऐसा नहीं है की एक पुरुष को स्वच्छ शौचालय की ज़रूरत नहीं है परन्तु एक स्त्री को कुछ ज़रूरी सुविधाएँ देना अति आवश्यक है|

एक स्वच्छ और सुन्दर वातावरण सभी अपने आस पास चाहते है| आज देशभर में स्वच्छता अभियान का बिगुल बजा  है|  हमारी वर्तमान सरकार इस अभियान में पूर्ण रूप से जुटी हुई है परन्तु सिर्फ कागजी अभियान से काम नहीं चलता | हरएक देशवासी को इस स्वच्छता मिशन में सहयोग देना होगा तभी जा कर हम अपने देश को साफ़ और सुंदर बना पाएंगे|

सरकार से एक अनुरोध है कि स्वच्छता का अभियान तो छेड़ दिया परन्तु जो शौचालय आपके द्वारा बनवा दिए गए है उनकी सफाई का अभियान भी छेड़ा जाये| और सभी कार्यालय चाहे वो सरकारी हो या प्राईवेट सभी में शौचालय की स्थिति के अवलोकन के लिए एक दल बनाया जाये और हर जगह की सफाई व्यवस्था के दौरे के साथ साथ शौचालय में मूलभूत सुविधाओं का दौरा भी कराया जाये|

धन्यवाद,

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