#Lekh by Rajendra Singh Kuwar Fariyadi

ट्रेन इलाहाबाद पहुंची। यमुना के पुल से जब गुजरने लगी तो लोग नदी में सिक्के उछालने लगे। इस तरह से लोगों को पानी में पैसे फेंकते हुए देखकर मुझे जरा भी यकीन नहीं हुआ कि मैं उसी प्रदेश में हूँ जहां एक हॉस्पिटल में सैकड़ों बच्चे  ऑक्सीजन की कमी से महज इसलिए मर गए कि ऑक्सीजन सिलेंडर वाले का पेमेंट नहीं हुआ और उसनें सप्लाई रोक दी। मैं उनके सिक्के फेंकने से किंकर्तव्यविमूढ़ था कि गर्व से फूल जाऊँ या शर्मिंदगी में सिर छिपा लूं।

 

एक बच्ची ने अपनी माँ से पूछा- मम्मी ये सिक्के क्यों फेंक रही हो ?

 

मम्मी ने कहा- बेटा, ये यमुना जी हैं। जैसे गंगा मैया,वैसे ही यमुना मैया।

 

बच्ची ने फिर पूछा- लेकिन पैसे क्यों फेंकते हैं ?

 

मम्मी ने खीझते हुए कहा- क्योंकि भगवान हैं।

 

बच्ची ने कहा- ओके मम्मी, पर पैसे क्यों फेंकते हैं।

 

मम्मी के पास जवाब नहीं था। वह चिढ़ गयी। अगल-बगल वालों की निगाह मम्मी पर टिक गयी थीं। मम्मी और चिढ़ गयी। गुस्से में मम्मी ने एक थप्पड़ बच्ची के गाल पर देते हुए कहा- जब कह रहे हैं भगवान हैं तो समझ नहीं आ रहा !!

 

बच्ची चुप हो गयी। यह बढ़िया तरीका है। जब किसी सवाल का तार्किक जवाब न हो तो सवाल करने वाले को पीट दो। मामला बड़ा हो तो हत्या करवा दो। जज जब प्रशासन से सवाल करे, बड़ी मछलियों के फंसने का डर हो तो उसकी हत्या करा देने में ही भलाई है।

हम चाहते हैं देश तरक्की करे। हमारे बच्चे तर्कशील हों पर जब उनके सवाल के जवाब हमारे पास न हों या हमारी कुरीतियों पर सवाल उठे, हमारी परंपरा टूटने का खतरा हो तो सवाल करने वाले को ख़ामोश कर देने में ही भलाई समझते हैं।

 

पुनर्जागरण काल तक यूरोप चर्च के द्वारा मान्यता थी कि समस्त ब्रह्मांड का केंद्र पृथ्वी है। निकोलस कापरनिकस, ब्रूनो ने चर्च की मान्यताओं को ध्वस्त किया। गैलीलियो को जेल में डाल दिया गया। ब्रूनो को जिंदा जलाया गया। पर आज हम गैलीलियो, ब्रूनो का महत्व समझ रहे हैं।

 

कोशिश तो ये होनी चाहिए कि बच्चे ज्यादा  से ज्यादा प्रश्न करें पर प्रश्न करते बच्चे हमें चुभ जाते हैं। पांचवी का बच्चा स्कूल से सौर मंडल के बारे में पढ़कर घर आता है। वह उसके बारे में जानने के लिए और जिज्ञासु होता है या इन सब से अनभिज्ञ माँ बाप को समझाने की कोशिश करता है। वह घर पर माँ को समझाता है- मम्मी, सूरज नहीं घूमता बल्कि धरती सूर्य के चारों ओर घूमती है।

 

माँ बिगड़ जाती है। बच्चा फिर कहता है- मम्मी चाँद मामा वामा कुछ नहीं होता, वहां तो लोग जाकर भी आ गए हैं। उसे देखकर आप व्रत क्यों रखती हो ?

 

माँ बच्चे का कान खींचते हुए एक लोटा पानी पकड़ाकर कहती है- जाओ पहले सूर्य भगवान को जल अर्पित कर आओ।

 

बच्चा लोटा पकड़े किंकर्तव्यविमूढ़ सा कभी किताब में बने सौर मंडल के चित्र बारे में सोचता है तो कभी माँ के द्वारा समाज के द्वारा बनाये गए तथाकथित सूर्य भगवान के बारे में। और प्रगतिशीलता, वैज्ञानिकता का गला घुंट जाता है।

 

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