#Lekh by Sanjay Verma

मन्वन्तर संग्रह पर प्रतिक्रिया

सामाजिक समरसता- सदभाव एवं विकास की वैचारिक  मन्वन्तर अवैतनिक-अव्यावसायिक -अनियतकालिक है|  संपादक हरिशंकर वट ने विभिन्न विषयों के साहित्य उपासकों को समाहित कर एक सुंदर सा संकलन सुधि पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया बच्चन लाल बच्चन कोलकाता -की पक्तियां “होती नहीं प्यार की मृत्यु किंतु हो जाता निः खोज जीवाश्म की तरह “(जीवाश्म की तरह ) रचना में कवि  ने प्यार की गहराई को जीवाश्म से तुलना कर आधुनिक रचना पाठको को मन्वन्तर के माध्यम से प्रदान की | एस डी  मालवीय इंदौर ने वृक्ष की महत्ता ,पर्यावरण  के पक्ष में रचना के माध्यम से अपनी बात कही-” मै पल्ल्वित हो गया हूँ यहाँ /मेरी नै कोपलें अभिनन्दन कर रही है /उस उदार ह्रद्य का ” ( ए बी रोड का वट वृक्ष ) | प्रो शुभदा पांडेय सिल्चर आसाम -“मिलन ये जल का ही नहीं /जल अस्तित्व का भी कछारों में बसे  तेरे गाँव ” (गंगा से अंतर्गंगा तक ) गंगा की पहचान  और पूर्ण अस्तित्व की महिमा बेहतर तरीके से बखान की है | कृष्ण कुमार यादव  जोधपुर -बदल रही है आज की कविता /वह सिर्फ सौंदर्य नहीं गढ़ती /बल्कि समेटती है अपने में सामाजिक सरोकारों को भी “( बदलती कविता )में युवापीढ़ी को संस्कृतियों के दरकने से बचाने की संदेश  देती एवं अनुशासन का मार्ग प्रशस्त करती है |आकांक्षा यादव जोधपुर – लघुकथा , अनाथ /बच्चा ,/बेटियाँ में शीर्षकानुरूप भावों को सजाया है | उदय ठाकुर हरियाणा -धर्मनिरपेक्षता  पर बेहतर लेने लिखी है “हम सब आपस में हमनशी है “| मोहन जगदाले  उज्जैन – की डप लघुकथा – वापसी/समझौता  मन की गहराईयों को छू जाने वाले शब्दों का जादू जगाया है | कृष्ण मोहन अम्भोज  राजगढ़ -की रचना में नव गीत चार चाँद लगते है “गीत गेंहूँ धान से ” ,”संवेदन के बस्ते ” “रंगकर्मी ” के बेहतर भावों को तनिक गौर करें “गीत सहेजे,तुलसी बिरवै ,तथा फूलदान से,चाहता हूँ ,इन्हें उगाऊँ अब गेंहूँ धान से ” | डा।हीरालाल बाछोतिया नईदिल्ली – बिलकुल अभी”सूरज चमक रहा है / पेड़ और परछाई का  /अंतर बता रहा है | ” सूरज अभी चमक रहा की आशा से बढ़ी हिम्मत फसलों को वरदान देती दिखलाई पढ़ती है | नारायण मघवानी उज्जैन – क्षणिकाएं ,दीप में बेहतरीन सुन्दर भावों की संजोती रचना वाकई भाव श्रेष्ठता दर्शाती है | अनुराधा चंदेल ओस  मिराजपुर यु पी “मिर्जापुर का पक्का घाट , मै  नदी की धारनदियों और घाटों से गहरा रिश्ता  रचनाकार का मालूम होता है |-“शायद नदियां होती है /हरने का संताप /चूड़ियों भरे हाथों ने / मांगी होगी सलामती की दुआ ” | अंजलि पंडित – कवितव्यता से संवाद की मंशा कवित्री रखती है | ये भाव कविता में ठीक तरीके से उतर आये है | संतोष कुमार नेमा जबलपुर – कविता अन्याय के विरुद्ध शंखनाद किया है | जो कीवर्त्तमान में समाधान की उम्मीद रखता है | संध्या विश्व नागदा जं – कवित्री किसी तारीफ की मोहताज नहीं है | कविता के गन इन्हे विरासत में मिले है | इन्होने अनेक मंचों पर निरंतर अपनी काव्य भूमिका बेहतर तरीके से बया की “प्रदुषण मुक्ति के लिए ,चलों हमारे साथ / पौधे रोपें रोज ही ,सभी हजारों हाथ ” संध्या दोहावली में एक से बढ़कर एक दोहे रचे है जो काव्य संग्रह में चार चाँद लगते है | सुरेंद्र भसीन -बौना से बोनजाई ,टूटे और तुम और कहानी ममता के आँसू को देखे तो रचना में  वर्तमान की आधुनिक कविता एक सच को दर्शाती है वही कहानी  -ममता के आँसूं  मर्मस्पर्शी भाव जगाते  है | राजेश अजनबी – की दो काव्य रचना ” दोस्तों की बड़ी मेहरबानी रही ाएवं इंतजार क्यों है ?तुकबंदी लिए रचना लघु होने के बावजूद साडी बातें बया करती है जो दिल में छुपी होती है | अब्दुल सत्तार अन्जान तराना उज्जैन – माँ पर लिखी माँ नहीं रही किन्तु माँ के आशीर्वाद और उनके संग की यादें  वाकई माँ आज भी आसपास है का अहसास कराती है | ये श्रेष्ठ रचनाओं में गिनती की जाने योग्य है | आर एस वर्मा एडवोकेट उज्जैन – कवी होने के साथ साथ अच्छे गायक भी है |”मै कलम हूँ ” लघुकथा में काव्य भाव झलका कर एक नै साहित्य विधा बनाई है | पसद आई | सविता मिश्रा आगरा -लंभी काव्य रचना ‘ माँ तू भगवान से भी अधिक दयालु “रचनाकार ने माँ को भगवन से भी अधिक दयालु बतलाया है जो की सच है | वही लघुकथ अमानत एवं पुरानी  खाई -पीई हड्डी बेहतर लघुकता है | कलेश व्यास कमल  उज्जैन – कवि ने उम्र परपर बेहतर कटाक्ष किया है – उम्र का जब उतार होता है / काफिया जोरदार होता है ” ऐसा लगता मानों छोटी पक्तियों में उम्र भर के लेखा जोखा रख दिया हो | कैलाश कुमरावत  खरगोन – भारत की धरती में देश भक्ति के  संदेश की भावना से शानदार तरीके से धरती की महत्ता बतलाई है “ऐसी पवन धरती है /इस धरती को करो प्रणाम “| सुकन्या राय  बिलासपुर -की रचना ” श्रम बिंदु और संस्मरण ” स्मृतियों की टोकरी “इस के संग्रह का ह्रदय है | बेहतर संस्मरण एक फिम का आभास देता है जो की श्रेष्ठ है | संपादक आर सी वट “प्रेमी ” उज्जैन की काव्य रचना “विवश ”  मर्मस्पर्शी और वेदना भरी पक्तिया आखों से आसूं झलका सकती है | इससे अच्छी कविता हो ही नहीं सकती क्यों ये रचना सभी के आसपास या स्वयं के संग जुड़ने का आभास कराती है | “अपनी देहरी पर लौट आई मृत देह जिसे महिलाओं  श्रंगार  कर सजाया हो एक मन सिहरन उत्पन्न करता है क्योकि  ये सच है और सयोंग से हमारी आँखों के सामने से दृश्य दिखा भी है | और अंत में आचर्य श्री निवास रथ “उज्जयिनी जयते “संस्कृत प्रधानरचना उज्जैन काके इतिहास का गौरव गान करती है  कुल मिलकर मन्वन्तर प्रधान संपादक श्रीमती इंद्रा वट संपादक हरिशंकर वट परिकल्पना- यश/ प्रांशु /स्नेहा /प्रांजलि  सहयोग -के अल चावण्ड प्रकाशक – संत बालीनाथ शोध संस्थान उज्जैन एवं श्रीमती मथुरादेवी वट स्मृति सम्मान समरोह समिति उज्जैनके साहित्य श्रम  से मन्वन्तर बेहतर संकलन बनकर साहित्य उपासकों के दिलों में जगह बनाने में सफल रहा | मन्वन्तर की टीम  और रचनाकारों को हार्दिक बधाई |

संजय वर्मा “दृष्टी “
125 शहीद भगतसिंग मार्ग
मनावर जिला धार (म प्र )
454446
9893070756

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