#Lekh by Vishal Narayan

–” आसमान से बड़ा छाता “–

भोजन की उम्मीद भूखे को खींच लाती है, पानी की उम्मीद प्यासे को खींच लाती है. स्नेह की उम्मीद बच्चों को खींच लाती है और प्यार की उम्मीद पर पूरी दुनिया खींची चली आती है. सच कहूँ तो हमें किसी की अहमियत तब पता चलती है जब हम उससे दूर होते हैं. हम सभी कहा करते हैं. मैं भी कहता था. घर में कैद कर रखा है. कहीं घुमने नही जाने देते और ना ही खेलने देते हैं. तो जनाब उन लोगों से पुछिए, जो किसी कारणवश पढ़ने लिखने या फिर कमाने के लिए घर छोड़ आए हैं. वो बताएँगे आपको घर किस दुआ का नाम है. यहाँ अपनी खुशीयाँ, अपने गम फेसबुक, व्हाट्सएप्प पर शेयर करनी पड़ती हैं. मानता हूँ सारी दुनिया को पता चल जाता है. पर वो जो घर की चारदिवारी के अंदर छोटी सी दुनिया है न उसे कुछ बताना भी नहीं पड़ता. वो तो बस खुद इतना खुश हो जाती है कि खुशियों की बाढ़ आ जाए. और आपके गम से वो इतनी दुखी हो जाती है कि आपके गम छोटे पड़ जाएँ. इस छोटी सी दुनिया के लोगों ने आपको कभी धन्यवाद, बधाई जैसे शब्द न बोले होंगे पर बिना बोले हीं ढ़ेर सारी नेमते दे जाते हैं. ढ़ेरो सारे आशीष, ढ़ेरो सारी दुआएँ. कभी कभी तो सँभालना मुश्किल हो जाता है.

 

हम कहते रहते हैं न माँ परेशान कर देते हो. दिन भर खाना, खाना और खाना. हम बच्चे नही रहे, बड़े हो गये हैं. एकदम परेशान कर देती है न. पर उसकी ये परेशानी आपको उस वक्त बहुत सताएगी जब वो आपके पास नही होगी. आपकी जेब में पैसे होंगे, होटलों में खाने होंगे पर कोई पुछनेवाला नही होगा. “बेटा खाया कि नही”. आपकी टाई, सुट बुट, आपके ऐशो आराम सबको दिखेंगे पर आपके पेट में दाना है कि नही, सिर्फ उस एक को दिखता है. आपको एक खरोंच आने पर दुनिया भर की दवाई खोज लाती है और जितने स्नेह से लगाती है, उसके आधे स्नेह से भी कोई लगा दे तो बता दीजिएगा. वैसे तो उसकी एक फुँक से आपके कितने दुख दर्द फुर्र हो जाए पर उसे खुद संतोष नही होता. वो खुद न जाने कितने कष्ट सहती है. किसी को पता तक चलने नही देती पर आपके एक आँसु के कतरे के लिए पूरी दुनिया एक तरफ खड़ा कर देती है वो भी सिर्फ और सिर्फ आपके लिए.

 

और एक शख्स है जिस से सभी दुरी बनाए रखते हैं. सभी उसकी ड़ाँट से परेशान हो जाते हैं. उसके सपनों से परेशान हो जाते है. पढ़कर अच्छा बनने की सलाह से परेशान हो जाते हैं. घबराइए नहीं आपकी ये परेशानी किसी दिन आपको और ज्यादा परेशान करेगी जब वो आपके पास नही होगा. जब पता भी नही चलेगा कि किधर जाएँ, तब याद आएगा वो. जब चारो तरफ अँधेरा ही अँधेरा होगा तब याद आएगा वो. आपके लिए सूरज से भी बड़ा उजाला है वो. आसमान से भी बड़ा छाता है वो. मुझे नही लगता पिता की परछाईं में किसा बेटे को किसी भी बात से ड़र लगा होगा. पर लगेगा जब वो परछाई नही होगी. पलकों पर आँसू उतर आएँगे पर कोई ड़ाँटनेवाला नही होगा. हो सकता है आप मुझसे ज्यादा खुशनससीब हों पर मेरे पास भी उनकी हजारों बातों हैं. उनके दिखाए हजारों रास्ते हैं, जिनपर चलकर मैं कभी अकेला नही होता. मुझे अक्सर ही लगा करता है कि बाबूजी साथ हैं मेरे. हाँ बाबूजी साथ में हैं.

✍–” विशाल नारायण “

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