#Muktak by Anil Anmol

ख़्यालों के दर्पण पे छायी धुंध को, बेख़्याली की रज़ मान लेते हैं,

हम हर इक वहम को अपने ज़हन-ओ-दिल की उपज मान लेते हैं,

या र’ब ये इश्क़ है या फ़रेब की तरफ बढ़ता एक और कदम,

वो हर बार झूठ बोलते हैं और हम हर बार सच मान लेते हैं,……

 

 

अनमोल…!

 

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