#Muktak by Anil Uphar

माना ज़िंदगी की दौड़ में बढ़ गए हो तुम ।

और शोहरत की ऊंचाई चढ़ गए हो तुम ।

माँ बाप की खिदमत का सबक सीखा नही तुमने

कैसे मान लें कि सारे सबक पढ़ गए हो तुम ।

 

अनिल उपहार

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