#Muktak by Anil Uphar

तू ही किरदार रहा है मेरे फसाने का ।

तू ही अंदाज़ रहा है मेरे तराने का ।

मेरे अधरों पे जो छलके वो गीत भी तू है

तुझसे सीखा है हुनर मैंने गुनगुनाने का ।

 

अनिल जैन उपहार

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