#Muktak by Annang Pal Singh

बल से जीता किसी को , तो वह आधी जीत ।

जीतो  पूरी  तरह  से ,  करके  सच्ची  प्रीत ।।

करके सच्ची प्रीत ,  जीत लो तुम जग सारा ।

यह  स्थाई  जीत,  इसी  पर  करो  विचारा ।।

कह “अनंग”करजोरि , प्यार ही रस्ता केवल ।

यह ही सच्ची शक्ति,यही अंतरमन का बल ।।

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धोखा अपने मित्र को , जान बूझ फऱ देय ।

निश्चित ही भगवान से , मोल दुश्मनी लेय ।।

मोल दुश्मनी लेय ,हृदय करि अपना जर्जर ।

रहती मन में टीस , मित्रता की जीवन भर ।।

कह “अनंग”करजोरि,मित्रता एक झरोखा ।

इसको करके बंद , स्वयं जन खाता धोखा।।

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घण्टा जिसने  एक भी , किया  व्यर्थ  बरवाद ।

समझो कीमत जिन्दगी की नहिं उसको याद ।।

की नहिं उसको याद , व्यर्थ जीवन दिन काटे ।

भूल  मुख्य  उद्देश्य ,  करे  नित  सैर  सपाटे ।।

कह “अनंग”करजोरि , यही माया का अण्टा ।

भूल गया जो लक्ष्य  , भटक काटे हर घण्टा ।।

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धोखा देते सभीको , दे विषय़ुत मुस्कान  ।

दिखे प्रतिष्ठा बाहरी ,भीतर पतित जहान ।।

भीतर पतित जहान  ,और के कंधे  तोड़े  ।

अपना काम निकाल , वीच रस्ते में छोड़े ।।

कह”अमंग”करजोरि,दिखे धंधा यह चोखा।

दे विषयुत मुस्कान , सभी को  देते धोखा ।।

 

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