#Muktak by Annang Pal Singh

अबतक जैसा किया है , पाया वैसा मूल्य ।
आगे कुछ ज्यादा करो,बन जाओ बहुमूल्य ।।
बन जाओ बहुमूल्य,लीक से हटकर करिये ।
जग को देउ नवीन, नयापन खुद में भरिये ।।
कह” अनंग”करजोरि,नहीं बदलोगे जबतक ।
वही मिलेगा नित्य , मिला है जैसा अबतक ।।

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चाबी हर दिल खोल दे ,निश्छल प्रिय मुस्कान ।
यह वह दर्शन जहाँ से , दिखे सत्य पहचान ।।
दिखे सत्य पहचान , शिष्ट आचार सिखावे ।
रस्ता नेक बनाय , हृदय सबके घुस जावे ।।
कह “अनंग”करजोरि,आज भौतिकता हावी ।
पर निश्छल मुस्कान,श्रेष्ठ हर दिल की चाबी ।।

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शुचिता और प्रसन्नता , वा कर्तव्य विधान।
बना रहे अंदर सदा , चाहे हर इंसान ।।
चाहे हर इंसान , लगें नहिं दुर्गुण झोंके ।
किन्तु मलिनता मन भर जाती पाकर मौके ।।
कह”अनंग”करजोरि,न उपजे मन वह रुचिता ।
जिससे अंदर बनी रहे सदभावी शुचिता ।।

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अंदर चलता अनवरत , वैचारिक टकराव ।
जो विचार जब जीतता , उसका दिखे प्रभाव ।।
उसका दिखे प्रभाव , सतत् यह चले लड़ाई ।
देखो ध्यान लगाय , सात्विकता कब आई ।।
कह “अनंग”करजोरि , बनो दृष्टा इहि अवसर ।
सध जाये यदि मौन , सधे टकराहट अंदर ।।

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