#Muktak by Annang Pal Singh

उद्योगी जन के लिये , झुकते सबके शीश ।
यदि आलस्य प्रधान मन,फल न देय आशीष ।।
फल न देय आशीष , आलसी समय नशाता ।
देता समय निकाल , व्यर्थ , पीछे पछताता ।।
कह “अनंग”करजोरि,समयधन अति उपयोगी ।
नहीं नशाता व्यर्थ , समय जो जन उद्योगी ।।

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स्वयं प्रसंशा मत करो , अपनी किसी प्रकार ।
खुद अपने सत्कर्म ही ,गुण गाते संसार ।।
गुण गाते संसार , काम नित परहित करिये ।
सदविचार ,सदभाव , सदेक्षा उर में भरिये ।।
कह” अनंग”करजोरि,मान की रखो न मंशा ।
करें सदा सत्कर्म , तुम्हारी स्वयं प्रसंशा ।।
अनंग पाल सिंह भदौरिया” अनंग”

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