#Muktak by Annang Pal Singh

जब संसय संदेह सब , बन जायें विश्वास ।
तब समझो तुम आगये ,बिल्कुल प्रभु के पास ।।
बिल्कुल प्रभु के पास, नहीं संसय का घेरा ।
करुणा, दया, प्रेम ,मिलता है वहाँ घनेरा ।।
कह “अनंग”करजोरि,मिटा दो शंका ,भय सब ।
जगे आत्म विश्वास , नहीं रहता संसय भय ।।

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माया साँपिन की पकड़ , है मजबूत जहान ।
आत्म तत्व दूषित करें , मूढ़ जीव अज्ञान ।।
मूढ़ जीव अज्ञान , थोप बैठे हैं मन पर ।
अज्ञानांधकार , का घेरा है जीवन पर ।।
कह”अनंग”करजोरि , सूर्य नहिं उगे उगाया ।
जकड़े बैठी खूब , सभी को साँपिन माया ।।

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जैसे खुजली खुजाने , में आनंद दिखाय ।
काम जनित सुख,सुख समझ मानव फँसता जाय ।।
मानव फँसता जाय , समझ बैठा सुख , दुख को ।
इस दुख के आधीन , भूल बैठा निज सुख को ।।
कह” अनंग” करजोरि , प्रकृति के बंधन कैसे ।
विष करता नित पान , समझता अमृत जैसे ।।
अनंग पाल सिंह भदौरिया”अनंग”

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