#Muktak by Annang Pal Singh

मौन साधना जो करे , नित प्रति चित ठहराय ।

मौन  घटित  होने  लगे , उनके  अंदर  जाय ।।

उनके अंदर जाय ,  मौन  घटता  है  ज्यों  ही ।

तेज ,शांति,संतोष , दिखे चेेहरे  पर  त्यों  ही ।।

कह “अनंग”करजोरि, सीखिये मनहिं बाँधना ।

करुणा, दया , प्रेम  उपजाती  मौन  साधना ।।

**

इज्जत के निर्माण में , लगता वक्त तमाम  ।

इज्जत बेइज्जत बने , करो न एसा काम ।।

करो न एसा काम , सोचिये भला बुरा सब ।

जिसमें परहित होय,काम करिये नित वह अब।।

कह” अनंग”करजोरि, सजाकर रखिये हिम्मत ।

औरों को सुख देउ , मिलेगी तुमको इज्जत ।।

**

ऐसे ढ़ूढ़ो सुधारक , खुद को लेंय सुधार ।
जो सुधारते और को , उन्हॆं न पकड़ो यार ।।
उन्हें न पकड़ो यार , लखें औरों में अवगुण ।
उनपर करो विचार,भरे जिनके उर सदगुण ।।
कह”अनंग”करजोरि , देख जन बनते वैसे ।
स्वयं करें बदलाव , ढूँढ़िये सज्जन ऐसे ।।
अनंग पाल सिंह”अनंग”

Leave a Reply

Your email address will not be published.