#Muktak by Annang Pal Singh

अगर शिष्टता नम्रता , नहिं सीखी जग माहिं ।
फिर कितना भी सीखलो,कोई मतलब नाहिं ।।
कोई मतलब नाहिं , संस्कारों का टोटा ।
मिलता है हर ज्ञान, जगत में पर है खोटा ।।
कह” अनंग”करजोरि, काम की नहीं विद्वता ।
सीखी नहीं जहान,किसी विधि अगर शिष्टता ।।

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केवल बाते ही नहीं , काम करो मन लाय ।
बातूनी से कभी भी , काम नहीं हो पाय ।।
काम नहीं हो पाय , बात में बात निकाले ।
समय करे बरवाद , व्यर्थ ही बैठे ठाले ।।
कह”अनंग”करजोरि,व्यर्थ है बातों का बल ।
काम बड़ा कुछ नाहिं,कर सकें कोरी बातें ।।

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तुम शाश्वत हो देह है , नश्वर क्षणिक अधीर ।
तुम शरीर से नहीं हो , तुमसे बना शरीर ।।
तुमसे बना शरीर , तुम्हारा घऱ अस्थाई ।
नाशवान यह देह , नहीं रहती इस्थाई ।।
कह “अनंग”करजोरि, अरे क्यों बैठे गुम सुम ।
निर्विकार ,निर्लिप्त , निरालय हो शाश्वत तुम।।
अनंग पाल सिंह भदौरिया” अनंग”

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