#Muktak by Annang Pal Singh

सारे गुण वा शक्तियाँ , आत्म तत्व में व्याप्त ।
इन्हें निकालो प्रेम से , बस इतना पर्याप्त ।।
बस इतना पर्याप्त , प्रेम अंतर की चाबी ।
स्वर्ग मोक्ष का द्वार , यहीं से खुलता भावी ।।
कह”अनंग”करजोरि, भरे इसमें गुण भारे ।
आत्म तत्व है पूर्ण , ईश गुण इसमें सारे ।।

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अपने चिन्तन चरित में , करिये नित्य सुधार ।
परमेश्वर की राह यह , समझो भली प्रकार ।।
समझो भली प्रकार ,साफ रख अपना अंतर ।
इसी राह से चलकर आता है परमेश्वर ।।
कह”अनंग”करजोरि, न देखो इत उत सपने ।
है ईश्वर दरबार , द्वार अन्तर में अपने ।।

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अपने चिन्तन चरित में , करिये नित्य सुधार ।
परमेश्वर की राह यह , समझो भली प्रकार ।।
समझो भली प्रकार ,साफ रख अपना अंतर ।
इसी राह से चलकर आता है परमेश्वर ।।
कह”अनंग”करजोरि, न देखो इत उत सपने ।
है ईश्वर दरबार , द्वार अन्तर में अपने ।।
अनंग पाल सिंह भदौरिया “अनंग”

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