#Muktak by Annang Pal Singh

[11:57 AM, 8/29/2018] Annang Pal Singh: निर्माता निज भाग्य का , खुद मानव संसार ।
भाग्यवान बनना अगर ,करिये आत्म सुधार ।।
करिये आत्म सुधार , कर्म ही भाग्य बनाये ।
कर्मों के अनुसार , लेख मस्तिष्क सजाये ।।
कह”अनंग”करजोरि,भाग्य यूँ लिखता जाता ।
खुद ही नर जग माहिं , स्वयं का है निर्माता ।।
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लग जाओ प्रभु काम में , मिलता चोखा दाम ।
घाटे में वह नहिं रहे , शुभता मिले तमाम ।।
शुभता मिले तमाम, काम निज प्रभुका करिये ।
फल है उसके हाथ ,काम करि उस पर धरिये ।।
कह”अनंग”करजोरि,न बिल्कुल अकल लगाओ ।
करो न सोच विचार , काम प्रभु के लग जाओ ।।
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निर्माता निज भाग्य का , खुद मानव संसार ।
भाग्यवान बनना अगर ,करिये आत्म सुधार ।।
करिये आत्म सुधार , कर्म ही भाग्य बनाये ।
कर्मों के अनुसार , लेख मस्तिष्क सजाये ।।
कह”अनंग”करजोरि,भाग्य यूँ लिखता जाता ।
खुद ही नर जग माहिं , स्वयं का है निर्माता ।।
अनंग पाल सिंह भदौरिया” अनंग”

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