#Muktak by Annang Pal Singh

चित रहता शुभकार्य में , यदि मन रहे प्रसन्न !
सदविचार अंदर उठें , रहे खुशी आसन्न !!
रहे खुशी आसन्न , सोच अच्छी बन जाती !
परसेवा , सहकार , सहज उर में उपजाती !!
कह”अनंग”करजोरि,निरत रहता नित परहित !
यदि मन रहे प्रसन्न , कार्य शुभ करता है मन !!

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दल दल का दलदल बड़ा , एकहिं एक न भाय !
जातिवाद दलदल फँसी , राजनीति चिल्लाय !!
राजनीति चिल्लाय , टाँग की मची खिंचाई !
अजजा अजा विधान , वोट कीचड़ दुखदाई !!
कहअनंग करजोरि , तुष्टिकारी यह केवल !
भाईचारा आज , सना दल दल के दलदल !!

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जीवन रक्षक तीन हैं , भोजन ,वस्त्र, मकान !
यदि ये तीनो ठीक हैं , फिर कैसा व्यवधान !!
फिर कैसा व्यवधान,लगाओ परहित तन मन !
सब में देउ लुटाय , बराबर से अपनापन !!
कह”अनंग”करजोरि, जायगा साथ यही धन !
इसीलिये परमार्थ , नियोजित करदो जीवन !!

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हिन्दू मानस मूलत: , प्रजातंत्र अनुकूल !
इसका हिन्दू तत्व ही ,लोकतंत्र का मूल !!
लोकतंत्र का मूल , विविधता इनमें भारी !
पर स्वभाव से एक ,एकता के व्यवहारी !!
कह”अनंग”करजोरि,सहजता,समता,साहस !
सब प्रकार से श्रेष्ठ,सरल,शुचि हिन्दू मानस !!

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