#Muktak by Annang Pal Singh

विलासिता में मत करो , अपना धन बरवाद !
इससे अबतक नहिं हुआ , कोई भी आवाद !!
कोई भी आवाद , नहिं हुआ इससे अबतक !
करके धन बरवाद , खुशी पाओगे कबतक !!
कह”अनंग” करजोरि , छोड़ सम्पदा दासता !
नहीं भला कर सकी,किसीका ये विलासिता !!
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एक मान्यता ,एक गुरु, एक ग्रंथ ,अवतार !
सम्प्रदाय यह ठीक है , धर्म न इसे विचार !!
धर्म न इसे विचार , और हिन्दुत्व न मानो !
विस्तृत धर्म विधान , हिन्दुओं का पहचानो !!
कह”अनंग”करजोरि, प्रेम ,समता, प्रधानता !
हिन्दू धर्म विशाल , नहीं है एक मान्यता !!
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उच्चाकांक्षा, कल्पना वा स्फूर्ति विचार !
जिसके मन उपजें नहीं , वह गरीब संसार !!
वह गरीब संसार , नहीं उत्साह जहाँ पर !
क्षुद्र, दरिद्र विचार , देंय सम्पदा कहाँ पर !!
कह”अनंग”करजोरि,जगाओ उर आकांक्षा!
सुख ,सम्पति,सम्मान,सजाये उच्चाकांक्षा !!
अनंगपाल सिंह भदौरिया “अनंग”

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