#Muktak by Annang Pal Singh

अंदर भी अवरोध हैं , बाहर भी अवरोध !
चलना है तुमको मगर ,अपना रस्ता शोध !!
अपना रस्ता शोध,अात्म हित कदम बढ़ाओ !
अंदर के व्यवधान , बड़े हैं उन्हें हटाओ !!
कह”अनंग”करजोरि, संस्कारों का चक्कर !
बदलो तुरत स्वभाव,युक्ति से घुसकर अंदर !!

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करता प्रकृति विरुद्ध जो ,मानव जग में काम !
निश्चित उसके भोगता , है भीषण परिणाम !!
है भीषण परिणाम , प्रकृति को छेड़े मानव !
सबको रहे दिखाय , खूब अबतक के अनुभव !!
कह”अनंग”करजोरि, नहीं पर मानव डरता !
सारे प्रकृति विरुद्ध , कार्य जीवन भर करता !!

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जन्मा हूँ जिस देश में , उसकी शान महान !
हिमगिरि सा पुण्यात्मा , सुरसरि सा वरदान !!
सुरसरि सा वरदान , महाराणा सा दमखम !
वीर शिवा से श्रेष्ठ , योद्धा हैं जग में कम !!
कह”अनंग”करजोरि,जन्म ले यहाँ अजन्मा !
मैं गर्वित हूँ खूब , यहीं पर मैं हूँ जन्मा !!
अनंग पाल सिंह भदौरिया”अनंग”

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