#Muktak by Annang Pal Singh

सज्जनता शालीनता ,आत्मीयता तीन !
भरे हुये हैं जीभ में , समझो इसे प्रवीन !!
समझो इसे प्रवीन,अहं के शब्द न बोलो !
रौब गाँठने हेतु,कभी जिव्हा मत खोलो !!
कह”अनंग”करजोरि,तुम्हारे पीछे जनता !
आयेगी खुद दौड़,जीभ में यदि सज्जनता !!

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करिये जिव्हा से सदा , औरों का गुणगान !
गुण ही देखो और के, अवगुण धरो न ध्यान !!
अवगुण धरो न ध्यान , प्रसंसा करिये सबकी !
कब घाटे में रहे , प्रसंसा तुमने जब की !!
कह “अनंग”करजोरि, गुणों से अंतर भरिये !
सदा गुणों की ओर , अग्रसर सबको करिये !!

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करिये जिव्हा से सदा , औरों का गुणगान !
गुण ही देखो और के, अवगुण धरो न ध्यान !!
अवगुण धरो न ध्यान , प्रसंसा करिये सबकी !
कब घाटे में रहे , प्रसंसा तुमने जब की !!
कह “अनंग”करजोरि, गुणों से अंतर भरिये !
सदा गुणों की ओर , अग्रसर सबको करिये !!

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अच्छाई होकर सक्रिय , नैतिकता बन जाय !
स्वास्थ्य और सम्मान का , पैमाना कहलाय !!
पैमाना कहलाय , श्रेष्ठ गति शील अवस्था !
बाँधे नहीं विधान , नीति से बँधी व्यवस्था !!
कह”अनंग” करजोरि , यही ऊँची सच्चाई !
परिभाषा में बाँध , नहीं सकते अच्छाई !!
अनंग पाल सिंह “अनंग”

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