#Muktak by Annang Pal Singh

पवित्रता , सदग्यान सम , नहीं और संसार !
इसी ग्यान , सदग्यान से , होते शुद्ध विचार !!
होते शुद्ध विचार , शुद्ध जो करदें अंतर. !
सदकर्मों की तभी प्रेरणा , उठती अन्दर !!
कह ंअनंग ंकरजोरि, यही सत्कर्म मित्रता !
आत्मानन्द विभोर करे , मन की पवित्रता !!

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मानव मन की गंदगी , भ्रम ,  अंधा विश्वास  !

अविश्वास भी तीसरा , इसका साथी  खास  !!

इसका साथी खास , करे पथ भ्रांत हमेशा    !

त्रिधा गंदगी का समझो  यह. ही है    पेशा  !!

कह ंअनंग ंकरजोरि,किया जग में यह अनुभव !

त्रिधा गन्दगी  है  जिसमें  वह  दूषित  मानव !!

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आत्म साधना  से  बढ़े , क्रांति , शांति , विश्रांति  !

स्वस्थ. होय तन मन तथा , रहे रोग  ना   भ्रांति  !!

रहे रोग ना भ्रांति , वाक  पटुता  उर    जागे       !

सर्वग्यता  प्राप्त  करके ,  सबको   अनुरागे      !!

कह ंअनंग ंकरजोरि,रहे ना शेष  जानना      !

सबसे उत्तम. और. श्रेष्ठ  है   आत्म   साधना    !!

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