#Muktak by Annang Pal Singh

नहीं छुपाये छुप सके , मानव श्रेष्ठ जहान !
जैसे खुशबू पुष्प की , खुद यश करे बखान !!
खुद यश करे बखान , श्रेष्ठता सबको भाती !
निज गुण , कर्म ,स्वभाव हेतु सबको उकसाती !!
कह”अनंग” करजोरि , गुणों की चर्चा भाये !
श्रेष्ठ गुणों की खुशबू ,छिपती नहीं छुपाये !!

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वक्त बहुत है कीमती , इसे न समझो आम !
खर्च हो गया वक्त जो ,मिले न खर्चे दाम !!
मिले न खर्चे दाम , वक्त को यूँ मत छोड़ो !
एक एक पल करो नियोजित ,मकसद जोड़ो !!
कह”अनंग”करजोरि ,यही हर ग्रंथ कहत है !
चलो वक्त के साथ , कीमती वक्त बहुत है !!

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शुद्ध कर लिया मन अगर , तीर्थ राज हो जाय !
सबसे उत्तम तीर्थ यह , इस जग में कहलाय. !!
इस जग में कहलाय , शुद्धता मन की नीकी !
शुद्ध मनः स्थिति के आगे , दुनियाँ फीकी !!
कह”अनंग ” करजोरि , नित्य मन माहिं युद्धकर !
तीर्थ यही निकटस्थ ,श्रेष्ठ ,नित मनहिं शुद्ध कर !!

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मौत जानिये जिंदगी की रिवर्स रफ्तार !
इसीलिये हर छण जियो करके सबसे प्यार !!
करके सबसे प्यार , जियो जीवन का हर छण !
काम करो सबके हित,जोड़ो परहित कण कण !!
कह ” अनंग “करजोरि,अमानत इसे मानिये !
सहचर, सहयोगी जीवन की मौत. जानिये !!

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ऐसे मन के तीर्थ में , करो नित्य अस्नान !
ग्यान रूप तालाब में , ध्यान रूप जल मान !!
ध्यान रूप जल मान,द्वेष रूपी मल धोलो !
यही परम गति मार्ग , इसीके राही होलो !!
कह “अनंग ” करजोरि,सुधारो अपना जीवन !
राग द्वेष मल धोकर. स्वच्छ करो ऐसे मन !!

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