#Muktak by Annang Pal Singh

भाग्य तुम्हारे हाथ में , शक्ति तुम्हारे हाथ !
सब कुछ अंदर आपके,तुम जो चाहो साथ !!
तुम जो चाहो साथ ,वही पौरुष, बल अंदर !
इसीलिये नित भाग्य बनाओ,अपना सुन्दर !!
कह”अनंग “करजोरि , साथ हैं संग सहारे !
सब प्रकार से है हाथों में , भाग्य तुम्हारे !!

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सूरज दिखता घड़े में , घड़ा जाय यदि फूट !
तो भी सूरज रहेगा , घड़ा गया है छूट !!
घड़ा गया है छूट , सूर्य का नाश न होता !
इसीतरह से आत्मतत्व इस तन को ढोता !!
कह”अनंग”करजोरि,आत्मा चेतनकण रज !
हर तन दिखे, घड़े में दिखता है ज्यों सूरज !!

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