#Muktak by Annang Pal Singh

नैतिक  मूल्यों की  यहाँ , करे प्रतिष्ठा धर्म  !

“तमसो मा ज्योतिर्गमय”,यही धर्म का मर्म !!

यही धर्म का मर्म , धर्म  है  एक  जागरण  !

पुनर्जन्म है धर्म , इस बिना  यहाँ है  मरण !!

कह”अनंग”करजोरि,धर्म ना होता भौतिक !

करे आत्म उद्धार ,पात्र भर  जाता नैतिक !!

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बोले सोचे लड़े  जन , धर्म  हेतु  संसार  !

किन्तु धर्म के लिये ना, जीने को  तैयार !!

जीने को तैय्यार, आत्मिक यह विधान है !

आत्मशक्ति सबसे,बढ़कर है यह प्रमानहै !!

कह”अनंग”करजोरि,धर्म अंतर पट खोले !

है  सच्चा  विज्ञान , धर्म  अंदर  से  बोले !!

 

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