#Muktak by Annang Pal Singh

अच्छा लेने के लिये , खूब  बटोरो  ज्ञान  !

देने को शुभ दान है,त्याग हेतु अभिमान !!

त्याग हेतु अभिमान, और पीने को गम है !

निगलो निज अपमान,क्रोध इतना क्या कम है !!

कह”अनंग “करजोरि,लोभ ममता का वच्छा !

तृप्ति और संतोष ,भरो उर  यह  ही  अच्छा !!

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अपने स्तर का जगत , रचता है जन आप  !

भाग्य और दुर्भाग्य का ,कायर करें प्रलाप !!

कायर करैं प्रलाप , भाग्य कर्मों का सहचर !

जैसे करते कर्म , बने  जन  वैसे  रुचिकर  !!

कह”अनंग”करजोरि,भाग्य के देख न सपने !

सोच समझकर कर्म,लेख जन लिखता अपने !!

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परहित जीते जो जगत , वह हैं जीवन  मुक्त  !

नित हित वह करते नहीं,सुवधा शक्ति प्रयुक्त !!

सुविधा शक्ति प्रयुक्त ,कभी निज हित ना करते !

पाप  कर्म  से  दूर  ,  सदा   रहते  उर  डरते !!

कह”अनंग “करजोरि,और के लिये जियें  नित !

बनते जीवन मुक्त , वही  जो  करते  परहित  !!

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