#Muktak by Annang Pal Singh

छोटी सी भी बुराई  , मत आने दो पास  !

बड़ी बुराई इसी से , बनकर आती खास !!

बनकर आती खास,बीज मत ऐसे डालो  !

द्वेष,ईर्ष्या,जहर , न  अपने  अंदर  पालो !!

कह”अनंग “करजोरि,चलो मत छल की गोटी !

बड़ा दर्द बन जाय , जहर की  पुड़िया  छोटी !!

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पर सिर पर मत थोपिये , अपना इच्छा तंत्र  !

सही दिशा में मोड़कर ,इच्छा  करो  स्वतंत्र !!

इच्छा करो स्वतंत्र , दिशा दे  काम  सँभारो  !

अपनी इच्छा कभी ,न औरों के  सिर  डारो !!

कह”अनंग”करजोरि,मनुज इच्छाओं का घर !

दृढ़ इच्छा से ताज , बँधा लेता जन सिर पर !!

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अनुभव अध्यापक बड़ा , इसको रखो सहेज  !

मधुर और  कटुता भरे , अनुभव  अंदर  भेज !!

अनुभव अंदर भेज , यही जीवन की ताकत  !

अनुभव  से  पैदा ,  होती  अंदर  की  चाहत !!

कह”अनंग “करजोरि,सभी कुछ इसमें सम्भव !

बड़ी शक्ति का स्रोत जगत में जीवन अनुभव !!

 

 

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