#Muktak by Annang Pal Singh

बेटी से सीखें  सभी , सदाचार  का  पाठ  !

शालीनता,विनम्रता,फिर भी सुत के ठाठ !!

फिर भी सुत के ठाठ,लगे आँखों का तारा !

पर धन बेटी जान , पुत्र को समझे  प्यारा !!

कह “अनंग “करजोरि,न रहती बेटी  लेटी  !

करती सारा  काम ,  खुशी  फैलाती  बेटी !!

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बेटा है यदि दृष्टि तो   ,बेटी पूरी सृष्टि  !

बेटा तारा आँख का ,बेटी ठण्डी वृष्टि !!

बेटी ठंडी वृष्टि,नदी की कल कल धारा !

है उल्लास उमंग ,खुशी बेटी व्यवहारा !!

कह” अनंग “करजोरि,न मन में देउ लपेटा !

ना बेटी से अधिक , प्यार कर सकता बेटा !!

अनंग पाल सिंह भदौरिया “अनंग”

 

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