#Muktak By Annang Pal Singh

गंगा  सा  पावन  लगे , बेटी  का  घर द्वार  !

कल कल करती नदी सी,है वह पावन धार !!

है वह पावन धार   ,खुशी  उल्लास  विखेरे  !

मधुर सरस वाणी में   ,प्यार मिलाकर  टेरे  !!

कह “अनंग “करजोरि,बेटियों बिन घर नंगा !

बेटी   मंगलमूर्ति,  लक्ष्मी  , पावन   गंगा  !!

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निर्णय करिये तुरत ही , यदि करना शुभ काम  !

अशुभ काम के  लिये  तो  ,दो  भरपूर  विराम !!

दो भरपूर  विराम , ताकि  वह  टल  ही  जाये  !

शुभ करिये तत्काल , क्योंकि वह टल ना पाये !!

कह” अनंग “करजोरि,करो शुभ होकर निर्भय  !

सोचो मत शुभ हेतु  , बिना  सोचे  लो  निर्णय !!

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जब हमको दिखने लगे , जीवन में क्या व्यर्थ  !
‘बोध’एक जन्मा हृदय , समझो  इसका  अर्थ !!
समझो इसका अर्थ , व्यर्थ अब रहे  न  अंदर  !
लगती बड़ी छलांग , ईश पथ  मिलता  सुन्दर !!
कह “अनंग “करजोरि,भरो शुचिता मन में अब !
निर्णय करिये तुरत  ,दिखे शुभता हमको  जब !!

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