#Muktak by Annang Pal Singh

दिखें सितारे गगन में , अंधकार जब होय  !
यूँ ही संकट के समय ,राह दिखाता कोय !!
राह दिखाता कोय , दीप बन जलते रहिये !
बनो मील के पत्थर  ,राह इधर है  कहिये !!
कह “अनंग “करजोरि ,सुअल्प प्रयास तुम्हारे !
देंगे राह दिखाय , गगन ज्यों  दिखें  सितारे  !!

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पूर्ण समर्पण कीजिये , गुरु से भली प्रकार  !
गुरू धर्म वा  मोक्ष  का ,  हेतु  होय  संसार !!
हेतु होय संसार ,  गुरू  शुभ  राह  दिखावे  !
गुरुहिं गहादो बाँह , पकड़ वह पार लगावे !!
कह “अनंग “करजोरि,गुरू जीवन का दर्पण !
सब कुछ देय दिखाय,कीजिये पूर्ण समर्पण !!

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जिसको चोर न ले सके , वह अनुभव वा ज्ञान  !

यह धन जितना हो  सके , संग्रह  करो  जहान !!

संग्रह  करो  जहान ,  सही  यह  ही  धन  तेरा  !

चुरा  न  पाये   चोर  ,   लूट  ना   सके  लुटेरा !!

कह “अनंग “करजोरि, बाँटिये जीभर  उसको  !

खर्च  करे  से  बढ़े   ,  दीजिये  चाहे  जिसको !!

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