#Muktak by Annang Pal Singh

मन करता है उपद्रव , गलत सलत समझाय. !

मन विचार का केन्द्र है , गढ़े विचार  सजाय !!

गढ़े विचार सजाय ,  चलाये  उल्टा  चक्कर  !

सब  रहते  हैरान , इसी  कारण  से  अक्सर !!

कह “अनंग “करजोरि,सँभालो अपना जीवन !

आत्म तत्व पहचान,  लगादो उसमें  ये  मन !!

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दुखमय कभी न हो सके , जीवन सत् के साथ  !

सत्य  जहाँ  बहने  लगे   , वहाँ  सरसता  पाथ !!

वहाँ  सरसता  पाथ   ,  वही   आनंद   हमारा  !

पर मन  के  संकल्पों  से ,  करलेउ   किनारा  !!

कह “अनंग “करजोरि, रहो जीवन भर निर्भ़य  !

सत्य अगर पा लिया , न होगा जीवन दुखमय !!

अनंग पाल सिंह भदौरिया” अनंग”

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