#Muktak by Annang Pal Singh

यूँ ही वहाँ न जाइये ,जहाँ राह ले जाय  !

छोड़ जाउ पदचिन्ह निज,अपनी राह बनाय !!

अपनी राह बनाय , जगत को राह दिखाओ  !

जगहित,परहित जहर,पियो निज देह गलाओ !!

कह “अनंग “करजोरि,न काटो जीवन यूँ ही  !

कहीं कभी भी निरुद्देश्य मत घूमो  यूँ हीं !!

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वहाँ बनाओ रास्ता  , जहाँ न  कोई  राह  !

छाप छोड़ अपनी चलो, जग में बेपरवाह !!

जग में बेपरवाह ,रहो अपना यश  छोड़ो  !

सच्ची राह बनाय ,  नई मानवता  जोड़ो !!

कह “अनंग “करजोरि,न उल्टे रश्ते जाओ !

जहाँ लोक कल्याण, राह निज वहाँ बनाओ !!

अनंग पाल सिंह भदौरिया “अनंग”

 

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