#Muktak by Annang Pal Singh

 

सदगुण हों यदि शुरू से , लें अपनापन खींच !
आत्मीयता , धैर्य को , पैदा करते सींच. !!
पैदा करते सींच , न आती मन अधीरता !
सफल पारिवारिक जीवन की खिले वीरता !!
कह ंअनंग ंकरजोरि,निकालो सारे दुर्गुण. !
शनैः शनैःभर लेउ खींचकर अन्दर सदगुण. !!

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स्थाई सुख ले उठे , ज्यों जल माहिं सरोज !
सावधान होकर करो , घर में सुख की खोज !!
घर में सुख की खोज,करो सुख लाओ ऊपर !
स्वयं सिद्ध सुख ही स्थाई. होता भू_ पर. !!
कह ंअनंग ंकरजोरि,दुखों की करो विदाई !
जमा करो छोटे छोटे सुख कर. स्थाई. !!
अनंग पाल सिंह भदौरिया ग्वालियर

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पहला सुख निर्मल वदन , दूजा धन सम्पत्ति !
दुरुपयोग इनका हुआ , तो ये बने विपत्ति !!
तो ये बने विपत्ति , तीसरा है शिक्छा सुख. !
अहंकार से बचो अन्यथा यह देगा दुख. !!
कह ंअनंग ंकरजोरि,आत्मसुख सब पर दहला !
स्थाई वा स्वयं सिद्ध सुख यह. ही पहला !!
अनंग पाल सिंह भदौरिया ग्वालियर

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धधकाता वा धधकता अंगारा है क्रोध !
बैर भाव इससे जगे ,जिसका फल प्रतिशोध !!
जिसका फल प्रतिशोध,जलाये अंदर अंदर. !
दुश्मन जले न जले , किन्तु खुद जले निरन्तर !!
कह ंअनंग ंकरजोरि, क्रोध भारी तड़पाता !
सदविचार ,सदभाव, जलाता वा धधकाता !!
अनंग पाल सिंह भदौरिया ग्वालियर

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