##Muktak by Annang Pal Singh

भारत माँ के पुत्र हम , इसपर कर अभिमान  !

सदविचार ,सदभाव का  ,यहाँ  खजाना जान !!

यहाँ  खजाना  जान  ,  करो  सत्कर्म  निरंतर  !

यह   देवों  की  भूमि  , देव  बसते  हैं  इसपर !!

कह” अनंग “करजोरि,लिखो अब एक इबारत !

सारे  जग   में श्रेष्ठ   ,  देश  है  अपना  भारत !!

अनंग पाल सिंह भदौरिया” अनंग ”

बेटा से  बेटी  बड़ी , दे  संसार   सँवार  !

उसे पढ़ाओ,बढ़ाओ,समझो मत बेकार !!

समझो मत बेकार ,बेटियाँ दौलत घर की !

पत्नी ,माँ बन साथी बनती कठिन डगर की !!

कह “अनंग “करजोरि,कभी ना देय चपेटा !

कभी न छोड़े साथ ,छोड़ जाता ज्यों बेटा !!

अनंग पाल सिंह भदौरिया” अनंग”

पानी ना फिर मिलेगा , खरचे दाम हजार  !

दुरुपयोग मत कीजिये , पानी का संसार  !!

पानी का संसार , बहुत  ही  छोटा  जानो  !

है अमूल्य यह चीज ,शक्ति इसकी पहचानो !!

कह “अनंग “करजोरि,सहोगे अति  हैरानी  !

जीवन का आधार , जीवनी रस  है   पानी !!

अनंग पाल सिंह भदौरिया “अनंग”

परमेश्वर का  स्मरण , और  नित्य  सत्संग  !

यही आत्म कल्याण हित है सम्पूर्ण प्रसंग !!

है  सम्पूर्ण  प्रसंग , बनाओ  एसा  जीवन  !

सत्पुरुषों का साथ करो उपजे अपनापन !!

कह “अनंग “करजोरि,देखिये घर घर ईश्वर !

सब जग रहा चलाय , एक सृष्टा परमेश्वर !!

अनंग पाल सिंह भदौरिया “अनंग”

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