#Muktak by Annang Pal Singh

सच्चे मित्र चुनाव  हित , आवश्यकता  एक. !

पढ़िये उत्तम पुस्तकें,नित नित सहित विवेक !!

नित नित सहित विवेक,पुस्तकें पढ़ो पढ़ाओ  !

अपनी रुचि अनुकूल ,मिले वह मित्र बनाओ !!

कह” अनंग” करजोरि,    मित्र दे जाते  गच्चे  !

पढ़िये  उत्तम ग्रंथ  , मित्र  यह  सबसे  सच्चे !!

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आगे नित  बढते रहो , बढ़ा आत्मविश्वाश  ।

घटे असम्भवता तथा , मिटे कठिनता खास ।।

मिटे कठिनता खास,इसे समझो समझाओ  ।

यह है सम्बल खास , आत्मविश्वाश बढ़ाओ ।।

कह ‘अऩंग’करजोरि , देखि कठिनाई  भागे  ।

बढ़ा आत्मविश्वाश , बढ़े जन नित नित आगे ।।

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जबतक फैलाओ नहीं , नहीं खाद उपयोग ।

धन भी फैला कर करो,उसका उचित प्रयोग ।।

उसका उचित प्रयोग , लगाओ धन जन हित में ।

पाओगे आनंद, खुशी ,अनुपम  परहित  में ।।

कह ‘अनंग’करजोरि,न धऩ सुख देता तबतक ।

परहित पर कल्याण ,हेतु यह लगे न जबतक ।।

अनंग पाल सिंह भदौरिया “अनंग”

 

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