#Muktak by Annang Pal Singh

बरषाता रहता कृपा , कृपा सिंधु बन मित्र  ।

भक्त औऱ भगवान का ,रिस्ता बड़ा विचित्र ।।

रिस्ता बड़ा विचित्र , प्रार्थना चले निरंतर  ।

प्रभु चरणों में ध्यान , भक्त का रहता अक्सर ।।

कह “अनंग”करजोरि, भक्त भगवान बनाता ।

फिर वह ही भगवान , कृपा अपनी बरषाता ।।

अनंगपाल सिंह भदौरिया “अनंग”

 

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