#Muktak by Annang Pal Singh

परिवर्तन दर्पण सरिस , करवाता जग बोध  ।

दर्शन करिये कभी भी , काम करो सब शोध ।।

काम करो सब शोध , मोह ,माया, मद त्यागो ।

दुर्विचार  , दुर्भाव  न   अन्दर  पनपे  जागो  ।।

कह “अनंग”करजोरि,सृष्टि नित करती नर्तन  ।

देय सीख सब भाँति , हमें जग का परिवर्तन ।।

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बाहर से दिखती नहीं , नारंगी की फाँक  ।

खूबसूरती व्यक्ति की , अंदर देखो झाँक ।।

अंदर देखो झाँक , वहीं सुन्दरता का घर  ।

बाहर से पहचान , नहीं हो पाती अक्सर ।।

कह “अनंग”करजोरि, देखिये अंदर घुसकर ।

खूबसूरती श्रेष्ठ , दिखाई  देय  न  बाहर  ।।

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करो प्रार्थना हृदय से , दीन भाव अपनाय  ।

माँग रखो या ना रखो, बिन माँगे मिलजाय ।।

बिन माँगे मिल जाय , भाव की बड़ी महत्ता ।

दे प्रभु तक पहुँचाय  , हमें सदभावी  सत्ता  ।।

कह “अनंग”करजोरि  ,हमारा यही  मानना  ।

दीन भाव वा शुद्ध , हृदय से  करो  प्रार्थना  ।।

अनंग पाल सिंह भदौरिया “अनंग”

 

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