#Muktak by Annang Pal Singh

 

जीवन सतत चले सदा, बिन , मन , वा प्रान. !
बिन इन्दियँ वा मन बिना,जिसका रहता ग्यान !!
जिसका रहता ग्यान,खुशी गम जिसको है सम !
उसी तत्व को आत्मरूप कहते जग में हम. !!
कह ंअनंग ंकरजोरि,जान ले जो जग में जन !
लगे एकसा उसको जन्म , मृत्यु वा जीवन. !!
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अपने को जाने बिना दूर न होय अभाव !
आत्मग्यान ही जगत का,अंतिम ग्यान प्रभाव !!
अंतिम ग्यान प्रभाव, आत्म ग्यानी ही ईश्वर !
आत्मग्यान से सभी ग्यान दुनियाँ के कमतर !!
कह ंअनंग ंकरजोरि,ग्यान के देखो सपने !
आत्मग्यान से प्राणि मात्र सब लगते अपने !!
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जिसने जग में पा लिया , दुनियाँ का सब ग्यान !
पर खुद को जाना नहीं , वह बेकार. जहान. !!
वह बेकार जहान , निरर्थक ग्यान. जुटाता !
सतत चेतना भाव जगत का जान न पाता !!
कह ंअनंग ंकरजोरि,सृष्टि उपजायी उसने !
पिण्ड तत्व में चेतनता भरवाई. जिसने !!

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