#Muktak by Annang Pal Singh

सकारात्मक सोच की , एक बनाओ फौज  ।

अविश्वास से लड़ाई  , लड़ते  रहिये  रोज  ।।

लड़ते रहिये रोज , निराशा  भी  दुश्मन  है  ।

आशा वा विश्वास , अटल जीवन का धन है ।।

कह “अनंग”करजोरि, सोच तजि नकारात्मक ।

प्रबल अस्त्र है एक , सोच  हो  सकारात्मक  ।।

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वर्तमान को समझ ले , वह ज्ञानी कहलाय  ।

करे आचरण परिस्थिति, के अनुरूप बनाय ।।

क अनुरूप बनाय , आचरण जो जन करते ।

वही विवेकी ज्ञान , वान सुख सुविधा  भरते ।।

कह “अनंग”करजोरि,समझिये इस विधान को ।

ज्ञानी  वही  कहाय , समझले  वर्तमान  को  ।।

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खुद को ही खुद भूलकर , घूम रहे संसार  ।

भूल आत्मा की बड़ी , बैठी मन से  हार  ।।

बैठी मन से हार , आत्मा अति बलशाली  ।

मन ने जाल बिछाय, बात अपनी मनवाली ।।

कह “अनंग”करजोरि,समझिये अपनी हदको ।

निज विवेकमय ज्ञान दीप से  देखो  खुदको ।।

 

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