#Muktak by Annang Pal Singh

असफलता का डर बड़ा , याकि सफलता चाह  ।

इसपर ही  आश्रित बहे ,  जीवन  तरल  प्रवाह  ।।

जीवन  तरल  प्रवाह  , प्रबल  इच्छा  आधारित  ।

जिसकी  इच्छा प्रबल ,  काम  वह होवे निश्चित ।।

कह “अनंग”करजोरि,  चाहते  अगर  सफलता  ।

मन से देउ निकारि , आज ही  डर  असफलता ।।

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अन्दर का सौंदर्य ही , असली और विचित्र  ।

सदविचार , सदभाव से, इसे जगाओ मित्र ।।

इस जगाओ मित्र , ध्यान परहित नित धरिये ।

जीवन है अति अल्प,समय को नष्ट न करिये ।।

कह “अनंग”करजोरि, वही लगता है सुन्दर  ।

सद्इच्छा,सत्कर्म, सदाशय,जिसके  अन्दर ।।

अनंग पाल सिंह भदौरिया” अनंग”

 

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