#Muktak by Annang Pal Singh

राहत और सनेह के , विकसित करिये भाव ।
सहृदयता, सहयोग का , पैदा करो स्वभाव ।।
पैदा करो स्वभाव , सभी अपने बन जाते ।
जिधर चल पड़ो ,चल सभी जन पीछे आते ।।
कह “अनंग”करजोरि, जगाओ मन में चाहत ।
सद्इच्छा, सदभाव ,सभी को देते राहत ।।

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सृष्टि बनादी स्वचालित , रचकर कर्म विधान  ।

अत: कर्म अनुसार सब ,फल  पाता  इंसान  ।।

फल पाता  इंसान , कर्म  ही  भाग्य  विधाता  ।

कर्म कलम से लिखा,लेख ही भाग्य कहाता ।।

कह “अनंग”करजोरि, वृत्ति,अनुरक्ति जगादी  ।

काम, मोह, लालच, आकर्षक सृष्टि  बनादी  ।।

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शक्ति संग्रहित कर करो , जीवन में हर काम  ।

अंतरमन में तय करो , सम्भव हर  परिणाम ।।

सम्भव हर परिणाम , तौल निज शक्ति सहारा ।

दृढ़ विश्वास ,शौर्य , साहस से  मिले  किनारा ।।

कह “अनंग”करजोरि, रहे परहित मन में नित  ।

होंय सफल सब काम,करो करि शक्ति संग्रहित ।।

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साहस में ही विजय है , कायरता है हार  ।

साहस वा उत्साह से ,जीवन लेउ सँभार ।।

जीवन लेउ सँभार,शौर्य,साहस उपजाकर ।

कायरता को अंतर,मन  से दूर  हटाकर  ।।

कह “अनंग”करजोरि,यही है विजयमंत्र बस ।

जैसे भी  बन  पड़े , जगाओ अंदर  साहस ।।

 

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