#Muktak by Annang Pal Singh

करमों से ही भाग्य  का , होता  है  निर्माण  ।

इसीलिये सत्कर्म करि,रचिये भाग्य विधान ।।

रचिये भाग्य विधान , कर्म है कलम तुम्हारी ।

जो चाहो लिखि लेउ ,भाग्य में कर्म सुधारी ।।

कह”अनंग”करजोरि,बचो जग के भरमों से  ।

भाग्य लिखा जाता है केवल निज करमों से ।।

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कठिनाई से मत डरो , उससे मिलती शक्ति  ।

धैर्य और विश्वास से , करिये इसकी  भक्ति ।।

करिये इसकी भक्ति , इसे मत बुरा बखानो  ।

महापुरुष  कठिनाई , से  ही  बनें  सुजानो ।।

कह “अनंग”करजोरि,बहुत का करूँ बड़ाई  ।

भर देती उत्साह, ज्ञान ,बल ,बुधि कठिनाई ।।

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है अज्ञानता रात धुप , तारे , चाँद विहीन ।
ज्ञान किरन सुप्रभात की,धरो निकारि प्रवीन ।।
धरो निकारि प्रवीन , ज्ञान है सुखद सबेरा ।
अज्ञानांधकार में क्यों , डाले हो डेरा ।।
कह “अनंग”करजोरि, ज्ञान से ही महानता ।
बहुत बड़ा अभिशाप , समझिये है अज्ञानता ।।
अनंग पाल सिंह भदौरिया” अनंग”

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