#Muktak By Annang Pal Singh

जीवन गति अटके नहीं , बहने दो निर्बाध  ।

दुर्भावों के बाँध गढ़ि,जीवन गति मत बाँध ।।

जीवन गति मत बाँध,सतत सदभाव बहाओ ।

सदविचार ,सदभाव, सदेच्छा नीर पिलाओ ।।

कह”अनंग”करजोरि,करो सत्कर्म मुदित मन ।

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सस्नेही,परिवार जन ,, औ’ मित्रों के साथ  ।

सामंजस्य बिठाइय़े ,सुख सुविधामय पाथ ।।

सुख सुविधामय पाथ,सभी से हिलमिल रहिये ।

अगर लगे कटु बात, किसीकी कुछ मत कहिये ।।

कह “अनंग”करजोरि, सीख है उत्तम ये ही  ।

सामंजस्य बिठाय ,  बनो  सबके  सस्नेही  ।।

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सात्विकता सहकारपन , जीवन दृष्टि उदार  ।

यही सार्थक जिन्दगी ,  का समझो आधार ।।

का समझो आधार , सभी को अपना मानो  ।

एक जीव का अंश , सभी में  है  पहचानो  ।।

कह”अनंग”करिजोरि, बड़ी बाधक भौतिकता ।

इससे स्वतन बचाय , भरो अन्दर सात्विकता ।।

अनंग पाल सिंह भदौरिया”अनंग”

 

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