#Muktak by Annang Pal Singh

रहता है जन अकेला, अहंकार के संग !
जीवन भर चलता अलग लेकर फीके रंग !!
लेकर फीके रंग , चले नित समानान्तर. !
अहंकार का बोझ उठाये फिरता बाहर. !!
कह ंअनंग ंकरजोरि,जिन्दगी भर दुख सहता !
अहंकार को गला न पाता अकड़ा रहता !!
अनंगपाल सिंह ंंअनंग ं
ग्वालियर म. पृ.

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