#Muktak by Annangpal Singh

सच्चा सुख संतोष वा शांति , स्वयं की शक्ति !
आशा ही आध्यात्मिक , जीवन की है भक्ति !!
जीवन की है भक्ति , अटल विश्वास हमारा !
परमेश्वर के बिना , नहीं कण भी संसारा !!
कह”अनंग”करजोरि , रहा जो इसमें कच्चा !
नहीं प्राप्त कर पाय ,कभी जीवन सुख सच्चा !!

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परिवर्तन के बिना जग , प्रगति पंथ कोउ नाहिं !
जो विचार बदलें नहीं , प्रगति नहीं उन माहिं !!
प्रगति नहीं उन माहिं , करो वैचारिक मंथन !
परिवर्तन ही नियम,प्रकृति का दिखता कन कन !!
कह”अनंग”करजोरि,प्रगतिमय जिनके जीवन !
उनके जीवन माहिं , दिखे निश्चित परिवर्तन !!

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सीधे ही निष्कर्ष पर, पहुँच जाँय जो लोग !
कभी कभी हो जाय सच,पर केवल संयोग !!
पर केवल संयोग , विचारो हर प्रकार से !
हर पहलू को सोच,समझ लो तीक्ष्ण धार से !!
कह”अनंग”करजोरि , बिना सोचे यदि बीधे !
निर्णय फिर जो होय , वही भोगोगे सीधे !!

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बाकी जीवन में नहीं , कुछ भी अपने हाथ !
शांत रहे जितने समय , वही धर्म का साथ !!
वही धर्म का साथ , आंतरिक जो प्रसन्नता !
वही समय है श्रेष्ठ , वही जीवन समरसता !!
कह”अनंग”करजोरि , धर्म अंदर की झाँकी !
बचे नहीं बिन शांति,धर्म का कण भी बाकी !!

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