#Muktak By Begraj Kalwasia

आज बसंत पँचमी पर ऋतुराज बसंत से जुड़े मेरे दस दोहे ।
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आया पर्व बसंत का, लेकर नव संदेश ।
कुदरत से बढ़कर नहीं, कोई भी उपदेश ।।
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नव पल्लव हर्षित हुए, मस्त हुए अंदाज  ।
रंग बसंती ओढ़कर, आया है ऋतुराज  ।।
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दीप्त दिशाएँ कर रही, अभिवादन स्वीकार ।
परिमल पूरित ऋतु से, जीव जगत गुलज़ार ।।
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धूप गुनगुनी खिल गई, हुआ शीत का अंत ।
फूलों की खुशबू उड़ी, आया सुखद बसंत ।।
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शुरु हो गई कोयल की, फिर से मीठी तान ।
कुदरत भी गाने लगी, नई सुबह के गान ।।
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मनचाहा मौसम मिला, जागी दिशा दिगंत ।
तन मन को उल्लास दे, सुंदर सुखद बसंत ।।
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सरसों ने पहना नया, पीत वर्ण परिधान ।
दुल्हन से दिखने लगे, भरे खेत खलिहान ।।
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कलियाँ मुस्कानें लगीं, फूल खिले चहुँ ओर ।
पुरवाई चलने लगी, पंछी भाव विभोर ।।
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मौसम में मस्ती भरी, कुदरत भी रंगीन ।
कोयलिया की कूक से, आलम हुआ हसीन ।
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कण-कण में अब हो गया, फिर से नव संचार ।
वन उपवन में छा गई, सुंदर सरस बहार ।।
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बेगराज कलवांसिया ‘ढूकड़ा’
ऐलनाबाद (हरियाणा)

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