#Muktak by Begraj Kalwasia

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस(8 मार्च) समर्पित मेरे दोहों का एक गुलदस्ता ।💐💐💐💐💐💐💐

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नारी तू नारायणी,   जीवन का आधार ।

गंगा जल सी निर्मला, कुदरत का उपहार ।।

 

नारी दुर्गा रूप है,  देवी का अवतार।

सरस्वती सीता सती, सावित्री सब नार ।।

 

नारी शक्ति स्वरूप है, कुदरत का वरदान ।

जिस घर नारी खुश रहे, वो घर स्वर्ग समान ।।

 

नारी नर की नींव है, जीवन का आधार ।

नारी बिन संभव नहीं,  दुनिया का विस्तार ।।

 

नारी बूंदें ओस की,  शीतल सुखद समीर ।

पावन घाटी प्रेम की, निश्छल निर्मल नीर ।।

 

नारी सागर प्रेम का, करुणा का भंडार ।

नर की निर्मल प्रेरणा, जीवन का आधार ।।

 

पल-पल नारी से जुड़ा, जुड़े सभी दिन-रात ।

नारी बिन होती नहीं, दिन की शुभ शुरुआत ।।

 

नारी रखती है भला, सबका कितना ख्याल ।

फिर भी उठते हैं सदा, उस पर कई सवाल  ।।

 

सदियों से ये नारियाँ, झेल रही है क्लेश ।

नारी अत्याचार पर,  कब जागेगा देश  । ।

 

नारी का नर ने सही, किया नहीं सम्मान ।

माना नित सामान है, समझा नहीं समान ।।

 

नारी की निंदा करे,  रोज करे अपमान ।

वो मानव मानव नहीं,  धरती पर शैतान ।।

 

कंधे से कंधा मिला, करती निश-दिन काम ।

गर नारी होती नहीं,  जीवन ढलती शाम ।।

 

नारों से बचती नहीं, अब नारी की लाज ।

थोथी बातें छोड़कर, ठोस करें कुछ काज ।।

 

नारी को मंजिल मिले, मिले पंख परवाज़ ।

पूर्ण आजादी मिले, दबे नहीं आव

 

बेगराज कलवांसिया ‘ढूकड़ा’

ऐलनाबाद [ सिरसा ]

 

 

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