# Muktak by Binod Kumar

दोहा 1

शतक सेटेलाइट का, बना आज इतिहास।

इसरो ने दम खम दिखा, चूमा नव आकाश।

दोहा 2

भीषण शीत प्रकोप से, काँपा राज्य बिहार।

पारा इतना गिर गया, हुए सभी लाचार।

दोहा 3

गजब यंत्र मोबाईल है,सब लोगों का शान।

दुनियाँ जैसे जेब में, कार्य करे आसान।

दोहा 4

वैसे जन जो आलसी, हैं धरती के बोझ।

जो रमते हैं कार्य में, वे करते कुछ खोज।

बिनोद कुमार “हँसौड़ा”

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