#Muktak by anil savaiya ” antarmukhi “

छल से ना जीते जाते ,जीवन के संग्राम
जीवन केवल मांगता ,मेहनत वाले काम
सत्कर्मौ से सारे अंधेरे स्वंय  ही छट जाते हैं
फिर चमकीली ही लगती है ,जीवन वाली शाम।

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