#Muktak by Kavi Anil Uphar

आज धूमिल हर स्वप्न हो गया बापू तेरे देश का ।

शर्मसार है ज़र्रा ज़र्रा आधुनिक परिवेश का ।

मानवता की लाश लिए वो खुद कांधे पर निकल पड़ा

पूछ रहा है सवा अरब अंजाम सियासी ऐश का ।

अनिल उपहार ।।।।।

416 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.