#Muktak by Kuwar ‘Bharti’

हम लाख अच्छे बने रहना चाहें, अधिकाँश को तो हम भाते नहीं,
विनम्रता पर्याय बनती निर्बलता की, लोग हमें पहचान पाते नहीं;
जब अति होती अन्याय की अपमान की, हम शांत रह पाते नहीं,
ज्वालामुखी क्रोध का फटता है तो, अच्छा बुरा समझ पाते नहीं ।

कुंवर भारती

554 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.