#Muktak by Lovelesh Dutt

शब्दों के अलंकरण से कविता नहीं बनती।

बड़े कवि के अनुकरण से कविता नहीं बनती।।

“शीश उतारे भुईं धरे” का भाव यदि नहीं है,

केवल कोरे व्याकरण से कविता नहीं बनती।

………………….डॉ० लवलेश दत्त(बरेली)

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One thought on “#Muktak by Lovelesh Dutt

  • March 7, 2017 at 9:08 am
    Permalink

    “शीश उतारे भुईँ धरे”
    इसका अर्थ स्पष्ट कीजिए।

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